मशरूम की उन्नत खेती कैसे करें Mushroom Ki Kheti
यहाँ पर हम मशरूम की तीन वैरायटी की बारे चर्चा करेंगे जो कि कम लागत में अच्छी उपज देती हैं |
(Mushroom Ki Kheti) - जैसे-जैसे मनुष्य मानसिक एवं आधुनिक युग की तरफ अग्रसर होता जा रहा है ठीक उसी तरह से शरीर के लिये पोषक-तत्व युक्त, गुणकारी, स्वादिष्ट, उपयोगी सब्जी भी अपने भोजन में लेना पसन्द करता है ।
मशरूम के फायदे हैं Benefits of Mushroom
ऐसी सब्जी जिसमें अधिक से अधिक गुण व उपयोगी हो, वह सब्जी केवल ”मशरूम सब्जी” ही कही जा सकती है क्योंकि यह सब्जी काफी मात्रा में प्रोटीन, खनिज लवण, विटामिन ‘बी’, ‘सी’ व ‘डी’ उपलब्ध कराती है । मशरूम खाने में बहुत स्वादिष्ट एवं पाचनशील होती है । यहां तक कि इसमें फल और सब्जी की तुलना में प्रोटीन की अधिक मात्रा होती है ।
इसमें फोलिक-अम्ल की उपलब्धता शरीर में रक्त बनाने में अधिक मदद करती है । इसका सेवन मनुष्य के रक्तचाप, हृदयरोग, रक्त की कमी को पूरा करने मे लाभकारी रहता है ।
मशरूम का उपयोग अनेक भोज्य पदार्थों में किया जाता है । यह आजकल अधिक प्रचलित होने से लगभग सभी स्थानों में उपलब्ध होती है । (Mixed Vegetables) -
इसके अतिरिक्त दाल, राजमा, आलू टमाटर, मटर आदि के साथ सब्जी के रूप में खाते हैं तथा सूप चावल के साथ पुलाव तथा चाइनीज-फूड में अधिक प्रयोग किया जाता है । इसको कई स्थानों पर खुम्भी के नाम से भी जानते हैं ।
मशरूम की खेती में सावधानियां (Mushroom Ki Kheti) (Mushroom Ki Kheti)
मशरूम की खेती के लिये कुछ मुख्य विशेष सावधानियां हैं जिनकी जानकारी आवश्यक है । क्योंकि इस सब्जी की खेती में अन्य सब्जियों की खेती से भिन्न कृषि-क्रियाएं अपनानी पड़ती हैं । जैसे- विशेषत: तापमान का नियन्त्रण एवं खाद-मिट्टी का मिश्रण जिसमें पूर्णत: पोषक तत्व उपलब्ध रहें ।
मशरूम की खेती की ट्रेनिंग (Mushroom Ki Kheti) (Mushroom Ki Kheti), (Training)
जैसे-
दिल्ली क्षेत्र के कृषकों एवं मशरूम उत्पादकों के लिये – माइकोलोजी एंड प्लान्ट पेथोलोजी डिवीजन, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली तथा स्नोव्यू मशरूम लैब एंड ट्रेनिंग सेन्टर, गांधी आश्रम, नरेला, दिल्ली-40 आदि ।
राष्ट्रीय खुम्बी अनुसंधान केन्द्र, चंबा घाट, सोलन, हिमाचल प्रदेश ।
मशरूम अनुसंधान केन्द्र, गो. ब. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर, उत्तरांचल ।
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